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Showing posts from December, 2025

राहु की प्रसन्नता का सरल तरीका जाने

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​ तंत्र शास्त्रों में राहु की शांति के लिए माटी से निर्मित त्रिकोण युक्त ॐ शिवलिंग का चमत्कारी रहस्य बतायें हैं जिस दिन गोचर में   अश्विन नक्षत्र हो! उस दिन राहुकाल में पार्थिव पूजन करने से जीवन की सारी रुकावट दूर होती हैं और भय, चिंता मिटती है!  सुख- समृद्धि, सफलता के द्वारा खुलने लगते हैं कभी आज़मा कर देखें!  तंत्र सिद्धांत का मूल नियम ये है कि  ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया  जाता है। यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग  का संयोग राहु की छाया शक्ति को  शांत करता है। राहु शांति से सम्बंधित प्राचीन श्लोक अर्धनारीश्वरं देवं भुक्तिमुक्ति-प्रदायकम्। राहु-ग्रस्तं मनो नित्यं शिवलिङ्गं विमोचयेत्॥ जो व्यक्ति शिवलिंग का आराधन करता है,  उसके मन पर राहु का प्रभाव धीरे-धीरे  समाप्त होकर मुक्ति प्रदान करता है। पार्थिव पूजन/शिवलिंग निर्माण का  तांत्रिक उल्लेख पार्थिवं शिवलिङ्गं तु सर्वदोषापहारकम्। भक्त्या निर्माय पूजेथ मानवो वांछितं लभेत्॥ राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा  करता है। अश्विन नक्षत्र— मानसिक व  शारीरिक रिपेयरिंग ...

शिव से ही सब हैं! शिव नहीं, तो सब शव की तरह हैं

​ हर हर हर महादेव  तू शिव को अगर बिसरा देगा, तो शक्ति कैसे पाएगा  शिव नाम का अमृत पाए बिना, तू मुक्ति कैसे पाएगा!! नासा और दुनिया के वैज्ञानिक भी शिवलिंग के  रहस्य जानकर अनेक किताबें लिख रहे हैं!  प्राचीन दुर्लभ तांत्रिक-आगम राहु तंत्र के अनुसार ईकारेण प्राणः स्थो, ईकारेणैव जीवनम्। ईकारेण शिवो देही, नात्र शंका कदाचन॥ इकार-त्यागे देहोऽयं, शवं भवति नान्यथा। अर्थात- इकार के कारण ही प्राण स्थिर रहता है, जीवन चलता  है और देही शिवतत्त्व से जुड़ा रहता है। इकार हटते ही शरीर शव बन जाता है। जाने क्या हैं-महादेव  शिव = कॉस्मिक एनर्जी; शव = डेड मैटर  • क्यों ‘इ’ है जीवन की सबसे सूक्ष्म शक्ति?  • शिव से इकार हटते ही शव बनने का वैज्ञानिक प्रमाण  • तांत्रिक ग्रंथों में इकार का दुर्लभ रहस्य  • मन, प्राण और कोशिकाओं में इकार की भूमिका  • इकार जप से मिलने वाले चमत्कारी लाभ शिव का वैज्ञानिक रहस्य  (Modern Science + Vedic Logic)  1. ब्रह्माण्ड में सबकुछ वाइब्रेशन + फ्रीक्वेंसी है।  2. ‘इ’ ध्वनि  उच्च आवृत्ति की जीवंत तरंग पैदा करती ...

शरी अंदरूनी सफाई के लिए Detoxkey

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​ शरीर का नेचुरल क्लीनअप सिस्टम-  ऑटोफैजी! महर्षि चरक ने इस प्रक्रिया  को 'स्व-भक्षण' बताया है!  क्या आप जानते हैं? हमारे शरीर में एक ऐसा नेचुरल  बायो-क्लीनअप सिस्टम मौजूद है  जो खराब और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं  को खुद ही खाकर शरीर को रिपेयर करता है।  इसी प्रक्रिया को Autophagy कहा जाता है Auto = स्वयं, Phagy = खाना। ऑटोफैगी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है  जिसके द्वारा कोशिकाएं अपने पुराने,  क्षतिग्रस्त या बेकार हिस्सों को तोड़कर  उनका पुनर्निर्माण व पुनर्चक्रण करती हैं। ऑटोफैगी कैसे काम करती है-  कोशिका अपने अंदर उन हिस्सों (जैसे खराब प्रोटीन और कोशिकांग) की पहचान  करती है जिन्हें हटाने की आवश्यकता है।  आयुर्वेद में हजारों वर्ष पहले ही कहा गया था: उपवासो महारोगान् हन्ति शुद्ध्यति देहकः। अर्थात-उपवास शरीर को भीतर से  शुद्ध करता है, रोगों का क्षय करता है। जब हम फास्टिंग करते हैं,  तो पुराने प्रोटीन, टॉक्सिन, डैमेज्ड सेल्स  और अप्राकृतिक फैट खुद-ही टूटकर  नष्ट होने लगते हैं और शरीर नई, ताज़ी  एवं स्वस्थ कोशि...