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राहु की प्रसन्नता का सरल तरीका जाने

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​ तंत्र शास्त्रों में राहु की शांति के लिए माटी से निर्मित त्रिकोण युक्त ॐ शिवलिंग का चमत्कारी रहस्य बतायें हैं जिस दिन गोचर में   अश्विन नक्षत्र हो! उस दिन राहुकाल में पार्थिव पूजन करने से जीवन की सारी रुकावट दूर होती हैं और भय, चिंता मिटती है!  सुख- समृद्धि, सफलता के द्वारा खुलने लगते हैं कभी आज़मा कर देखें!  तंत्र सिद्धांत का मूल नियम ये है कि  ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया  जाता है। यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग  का संयोग राहु की छाया शक्ति को  शांत करता है। राहु शांति से सम्बंधित प्राचीन श्लोक अर्धनारीश्वरं देवं भुक्तिमुक्ति-प्रदायकम्। राहु-ग्रस्तं मनो नित्यं शिवलिङ्गं विमोचयेत्॥ जो व्यक्ति शिवलिंग का आराधन करता है,  उसके मन पर राहु का प्रभाव धीरे-धीरे  समाप्त होकर मुक्ति प्रदान करता है। पार्थिव पूजन/शिवलिंग निर्माण का  तांत्रिक उल्लेख पार्थिवं शिवलिङ्गं तु सर्वदोषापहारकम्। भक्त्या निर्माय पूजेथ मानवो वांछितं लभेत्॥ राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा  करता है। अश्विन नक्षत्र— मानसिक व  शारीरिक रिपेयरिंग ...

शिव से ही सब हैं! शिव नहीं, तो सब शव की तरह हैं

​ हर हर हर महादेव  तू शिव को अगर बिसरा देगा, तो शक्ति कैसे पाएगा  शिव नाम का अमृत पाए बिना, तू मुक्ति कैसे पाएगा!! नासा और दुनिया के वैज्ञानिक भी शिवलिंग के  रहस्य जानकर अनेक किताबें लिख रहे हैं!  प्राचीन दुर्लभ तांत्रिक-आगम राहु तंत्र के अनुसार ईकारेण प्राणः स्थो, ईकारेणैव जीवनम्। ईकारेण शिवो देही, नात्र शंका कदाचन॥ इकार-त्यागे देहोऽयं, शवं भवति नान्यथा। अर्थात- इकार के कारण ही प्राण स्थिर रहता है, जीवन चलता  है और देही शिवतत्त्व से जुड़ा रहता है। इकार हटते ही शरीर शव बन जाता है। जाने क्या हैं-महादेव  शिव = कॉस्मिक एनर्जी; शव = डेड मैटर  • क्यों ‘इ’ है जीवन की सबसे सूक्ष्म शक्ति?  • शिव से इकार हटते ही शव बनने का वैज्ञानिक प्रमाण  • तांत्रिक ग्रंथों में इकार का दुर्लभ रहस्य  • मन, प्राण और कोशिकाओं में इकार की भूमिका  • इकार जप से मिलने वाले चमत्कारी लाभ शिव का वैज्ञानिक रहस्य  (Modern Science + Vedic Logic)  1. ब्रह्माण्ड में सबकुछ वाइब्रेशन + फ्रीक्वेंसी है।  2. ‘इ’ ध्वनि  उच्च आवृत्ति की जीवंत तरंग पैदा करती ...

शरी अंदरूनी सफाई के लिए Detoxkey

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​ शरीर का नेचुरल क्लीनअप सिस्टम-  ऑटोफैजी! महर्षि चरक ने इस प्रक्रिया  को 'स्व-भक्षण' बताया है!  क्या आप जानते हैं? हमारे शरीर में एक ऐसा नेचुरल  बायो-क्लीनअप सिस्टम मौजूद है  जो खराब और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं  को खुद ही खाकर शरीर को रिपेयर करता है।  इसी प्रक्रिया को Autophagy कहा जाता है Auto = स्वयं, Phagy = खाना। ऑटोफैगी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है  जिसके द्वारा कोशिकाएं अपने पुराने,  क्षतिग्रस्त या बेकार हिस्सों को तोड़कर  उनका पुनर्निर्माण व पुनर्चक्रण करती हैं। ऑटोफैगी कैसे काम करती है-  कोशिका अपने अंदर उन हिस्सों (जैसे खराब प्रोटीन और कोशिकांग) की पहचान  करती है जिन्हें हटाने की आवश्यकता है।  आयुर्वेद में हजारों वर्ष पहले ही कहा गया था: उपवासो महारोगान् हन्ति शुद्ध्यति देहकः। अर्थात-उपवास शरीर को भीतर से  शुद्ध करता है, रोगों का क्षय करता है। जब हम फास्टिंग करते हैं,  तो पुराने प्रोटीन, टॉक्सिन, डैमेज्ड सेल्स  और अप्राकृतिक फैट खुद-ही टूटकर  नष्ट होने लगते हैं और शरीर नई, ताज़ी  एवं स्वस्थ कोशि...

कालसर्प और राहु के कष्टों से मुक्ति पाने के गुप्त रहस्य

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जीवन को बदलना चाहते हो,  तो अवश्य पढ़ें!  राहु के  गुप्त और गोपनीय रहस्य  प्राचीन ग्रंथ राहु तंत्र में उल्लेख मिलता है  कि सोमवार को जब शुक्र का महालक्ष्मी  नक्षत्र पूर्वाषाढ़ हो, तब पाँच महाभूत प्रतीक त्रिकोण युक्त पार्थिव शिवलिंग बनाने से  राहु की विशेष कृपा मिलने लगती है!  शुक्र राहु और दैत्यों के गुरु हैं! दुखों से  मुक्ति पाने के लिए राहुकाल में पूजा जरूरी है! शुरू के १५ दिन भयंकर निगेटिव ऊर्जा  निकलने से उच्चाटन भी होगा लेकिन  ५४ दिन बाद जीवन तेजी से बदलेगा!  दुख-रोग, कष्ट, भय,भ्रम, डर, तनाव,  डिप्रेशन ये सब राहु का भोजन है! राहु मन-मस्तिष्क, अंतर्मन और आत्मा की सफ़ाई  कर उन्नति प्रदान करता है! सफलता में  सहायक है!  amrutampatrika.com और अमृतम कालसर्प विशेषांक से साभार  प्राचीन ‘राहु तंत्र’ ग्रंथ में वर्णित है कि शुक्रस्य पूर्वाषाढायां त्रिकोणयुक्तं शिवलिङ्गं निर्मितं!राहोः प्रसादकारणं भविष्यति न संशयः॥ अर्थात्- जब सोमवार के दिन शुक्र का  महालक्ष्मी नक्षत्र पूर्वाषाढ़ गोचर  में प्रभावी ह...

Dimag ka udar se rishtedari kya hai ? दिमाग का पेट से नाता

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​ आयुर्वेद कहता है जठराग्नि ही प्राणों की देवी है। अर्थात् जो पेट को जीत ले,  वह मन और मस्तिष्क को भी जीत लेता है। क्या है पेट-दिमाग का रहस्यमय संबंध? आँतें दूसरा मस्तिष्क हैं- दिमाग का रास्ता पेट से जाता है! आधुनिक विज्ञान आज उस सत्य को  स्वीकार कर चुका है, जो चरक, सुश्रुत और काश्यप संहिता में हज़ारों साल  पहले लिखा गया था। 👉 मन का आधा स्वास्थ्य पेट में छिपा होता है। 👉 आँतों में मौजूद 100 मिलियन नर्व  सेल्स ही इसे ‘Second Brain’ बनाते हैं। आयुर्वेद का दृष्टिकोण पेट = दिमाग की जड़ है ! चरक संहिता  (चिकित्सा स्थान) में कहा गया है कि अग्नि (Digestive Fire) का संतुलन  सीधे मन, स्मृति, बुद्धि और भावों  पर प्रभाव डालता है। अग्निम् विना न शरीरे जीवनं, अग्निस्थो मनसः प्रसादः। जाठराग्निः शांतः स्यात् चेत्, धीयं बलं च वर्धते॥ अर्थात -  • अग्नि बिना शरीर का संचालन असंभव  • जठराग्नि शांत हो तो मन प्रसन्न  • और बुद्धि, शक्ति, निर्णय क्षमता बढ़ती है              यही कारण है कि आयुर्वेद में पेट को मन     ...

चिरायता एक चमत्कारी बूटी!

चिरायता प्रकृति का कड़वी चमत्कारी बूटी है! लेकिन अमृत समान औषधीय चमत्कार कड़वी बात! कड़वी दवा स्वस्थ जीवन का आधार है! कड़वाहट ही चिरायता की पहचान है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत! ५ से अधिक आयुर्वेदिक ग्रंथ और गूगल से साभार भावप्रकाश अनुसार चिरायता के  विभिन्न भाषाओं में नाम हिन्दी – चिरायता संस्कृत – किरात, किरातिक्त मराठी – किराईत गुजराती – करियातु बंगाली – चिरेता अंग्रेजी – Chiretta लैटिन – Swertia Chirayita चिरायता का स्वरूप और प्रकृति-  हरे रंग की यह पर्वतीय जड़ी-बूटी मुख्यत: ये नेपाल में पाई जाती है। इसका स्वाद अत्यंत कड़वा और प्रकृति से गर्म होती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह त्रिदोष नाशक औषधि है। सावधानी-  चिरायता का अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह कमर के लिए हानिकारक हो सकती है। इसके दोषों को अनीसून (एक सुगंधित जड़ी) दूर करता है। कहते हैं कि जैसे  सुगंध में केसर सर्वोत्तम है, वैसे कड़वाहट में चिरायता सबका बाप  है! लेकिन तन के सारे पाप धोकर आप को हेल्दी बना देता है! निगेटिव माइंड वालों के लिए ये अचूक है! रोज़ चिरायता के सेवन से मन में बेकार के विचार और ख्याल आ...

चिरायता रोगों का रायता नहीं फैलने देता

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भावप्रकाश निघण्टु-पृष्ठ ७० के अनुसार चिरायता सन्निपात ज्वर, श्वास, कफ, पित्त, रक्तदोष यानि खून की खराबी, दाह, कास, शोथ, प्यास, कुष्ठ ज्वर, व्रण तथा कृमि इन सब रोगों को दूर करता है। चिरायता बहुत कड़वा होने से इसका एक नाम किरात भी है। अथ किरातकस्य नाम गुणा नाह- श्लोक है- !! सन्निपातज्वरश्वासकफपित्तास्त्र दाहनुत्। कासशोथतृषाकुष्ठ ज्वर व्रणकृमिप्रणुत्। । चिरायता- सर्वश्रेष्ठ ज्वर, संक्रमण नाशक बूटी है।सबसे बेहतरीन क्वालिटी का चिरायता केवल नेपाल देश में मिलता है। यहां मिलने वाला चिरायता कालमेघ है, जो सभी आयुर्वेद की दुकानों पर बिकता है। शुद्ध नेपाली चिरायता महंगा होने के कारण बाजार में मिलना मुश्किल है।चिरायता एक ग्राम की मात्रा में रोज बिना किसी रोग के लिए जा सकता है। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रन्थ के चित्र में चिरायता की सम्पूर्ण जानकारी प्रस्तुत है। आप चाहें, तो शुद्ध चिरायता से निर्मित अमृतम फ्लू की माल्ट का सेवन कर सकते हैं। ऑनलाईन उपलब्ध