शिव से ही सब हैं! शिव नहीं, तो सब शव की तरह हैं
हर हर हर महादेव
तू शिव को अगर बिसरा देगा, तो शक्ति कैसे पाएगा
शिव नाम का अमृत पाए बिना, तू मुक्ति कैसे पाएगा!!
नासा और दुनिया के वैज्ञानिक भी शिवलिंग के
रहस्य जानकर अनेक किताबें लिख रहे हैं!
प्राचीन दुर्लभ तांत्रिक-आगम राहु तंत्र के अनुसार
ईकारेण प्राणः स्थो, ईकारेणैव जीवनम्।
ईकारेण शिवो देही, नात्र शंका कदाचन॥
इकार-त्यागे देहोऽयं, शवं भवति नान्यथा।
अर्थात-
इकार के कारण ही प्राण स्थिर रहता है, जीवन चलता
है और देही शिवतत्त्व से जुड़ा रहता है।
इकार हटते ही शरीर शव बन जाता है।
जाने क्या हैं-महादेव
शिव = कॉस्मिक एनर्जी; शव = डेड मैटर
• क्यों ‘इ’ है जीवन की सबसे सूक्ष्म शक्ति?
• शिव से इकार हटते ही शव बनने का वैज्ञानिक प्रमाण
• तांत्रिक ग्रंथों में इकार का दुर्लभ रहस्य
• मन, प्राण और कोशिकाओं में इकार की भूमिका
• इकार जप से मिलने वाले चमत्कारी लाभ
शिव का वैज्ञानिक रहस्य
(Modern Science + Vedic Logic)
1. ब्रह्माण्ड में सबकुछ वाइब्रेशन + फ्रीक्वेंसी है।
2. ‘इ’ ध्वनि उच्च आवृत्ति की जीवंत तरंग पैदा करती है।
3. यह तरंग हार्ट-बीट, नर्व-इम्पल्स और
माइटोकॉन्ड्रियल एक्टिविटी को सक्रिय करती है।
4. जब यह ध्वनि-ऊर्जा रुकती है!
कोशिकाएँ एपोप्टोसिस मोड में जाती हैं यानी मृत्यु।
भोलेनाथ स्वरूप हमारे गुरु श्री श्री भवानी नन्दन यति जी
कहते हैं कि ध्वनि ही सृष्टि का मूल है, और इकार
ध्वनि ही जीवन का मूल है।
शिव और ‘इकार’ शक्ति का दुर्लभ रहस्य
शिव – इ = शव
यानी जिस क्षण चेतना (इकार) हटती है,
वही महाशक्ति-रहित देह शव बन जाती है।
यही कारण है कि शिव को आदियोगी,
परम चेतना, और कॉस्मिक एनर्जी का केंद्र कहा गया है।
इकार क्या है? वैज्ञानिक दृष्टि से
इकार = Energy + Intelligence + Impulse
यह ध्वनि शरीर के भीतर—
• बायो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड सक्रिय करती है
• मस्तिष्क में प्राण विद्युत को स्थिर करती है
• कोशिकाओं में ऑटोनॉमिक न्यूरल सिग्नलिंग बढ़ाती है
जब तक यह इकार ऊर्जा सक्रिय रहती है,
तब तक शरीर जीव (Life) कहलाता है।
इसके लुप्त होते ही देह शव (Dead Matter)।
आध्यात्मिक दृष्टि से ‘इ’ क्यों है अमृतस्वरूप?
इ = ईशिता शक्ति (चेतना को गति देने वाली शक्ति)
यही शक्ति—
• प्राणों को चलाती है
• मन को दिशा देती है
• कर्म को ऊर्जा देती है
• आत्मा और शरीर का संबंध बनाए रखती है
इकार ही शिव को शिव बनाए रखती है,
वरना वे भी केवल शव-तत्व हैं—
इसलिए कहा गया:
“शिव बिना शक्ति शवं।”
दुर्लभ तांत्रिक रहस्य
तंत्र में ‘इ’ को वीज-चेतना कहा गया है।
बिना इस शक्ति के—
• मंत्रों में प्रभाव नहीं
• साधना में सिद्धि नहीं
• देह में प्राण नहीं
• कुण्डलिनी में जागरण नहीं
इसलिए तांत्रिक मानते हैं कि इकार =
जीव का प्रथम प्राण स्पंदन।
क्या आप जानते हैं?
दुनिया के सबसे शक्तिशाली मन्त्रों में से
एक ॐ नमः शिवाय केवल आध्यात्मिक नहीं,
बल्कि वैज्ञानिक Sound-Frequency
स्टरिंग कोड भी है।
नमः शिवाय का पुराणोक्त वैदिक रहस्य-
“ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षरी मंत्र है
“न, म, शि, वा, य” -यह पाँच तत्वों
यानि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
का प्रत्यक्ष ध्वनि-रूप माना गया है।
शिव = शून्य + चेतना और यह मंत्र आपको
तत्वों की मूल शक्ति से जोड़कर मन-शरीर
को रीसेट करता है। वैज्ञानिक प्रमाण: क्यों
यह मंत्र शरीर की हीलिंग को जगाता है?
Sound Frequency Resonance
शि” और “वा” ध्वनि—
• vagus nerve को activate-
•cortisol (stress hormone) कम करती है
• brain में alpha-waves बढ़ाती है
यह वही waves हैं जो deep meditation
में बनती हैं।
Cellular Repair & Autophagy Support
2023 की neuro-vibration स्टडी में
देखा गया कि मंत्र-ध्वनि damaged सेल
pathways को calm करती है
inflammation कम करती है
body की natural autophagy
को subtle level पर activate करती है
Heart-Brain Coherence
!! ॐ!! की ध्वनि 432Hz natural
harmonic frequency के क़रीब है,
जो heart-brain synchronization
पैदा करती है! यानी मन शांत, शरीर ऊर्जा-पूर्ण।
नमः शिवाय शान्ताय नाथाय परमात्मने।
निर्गुणाय निराकाराय नमः शिवाय शम्भवे॥
(रुद्रयामल तंत्र)
अर्थात
जो भी शिव मंत्र का जाप करता है,
उसके भीतर शुद्ध चेतना, स्थिरता और
दिव्य सुरक्षा पैदा होती है।
इसे “Stirring Mantra” कहा जाता है?
क्योंकि यह—
✓ मन में स्थिरता जगाता है
✓ अनकहे डर को dissolve करता है
✓ brain को स्टरिंग करके clarity देता है
✓ energy field को शुद्ध करता है
✓ पाँचों तत्वों को संतुलित करता है!
पंचाक्षर मंत्र मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है
• प्राण ऊर्जा को स्थिर करता है
• तनाव घटाता है
• मेडिटेशन को गहरा करता है
• आभा क्षेत्र (Aura) को शक्तिशाली बनाता है
सिर्फ 5–7 मिनट का जाप—
मन की दिशा और दिन की ऊर्जा
बदल सकता है।
#amrutam #amrutamglobal
Comments
Post a Comment