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Showing posts from October, 2026

श्राद्ध ही श्रद्धा है अमृतम पत्रिका ग्वालियर

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 पक्ष: पितरों को मानें या न मानें? एक बार अपने हृदय से पूछिए… कि हम आज जो हैं, उसमें हमारा कितना है? पितृ प्रतीक पाँच पार्थिव शिवलिंग हैं  और हमारे पीछे खड़े उन अनगिनत पूर्वजों का कितना, जिनका चेहरा तक हमें याद नहीं? संसार में सभी पर तन का पितृऋण होता ही है और यदि धन का भी है, तो पितरों की आत्मा को शांति देने हेतु श्राद्ध कर्म जरूरी है। हमारे पितृ पूर्वज हमें पालने-पोसने, घर चलाने, सुख-सुविधा देने हेतु अनेक तरह के पाप कर्म, छल कपट करते हैं। पितरों का किया-धरा पुण्य पाप उन्हीं के साथ जाता है और वे मारते समय उम्मीद रखते हैं कि हमारे वंशज हमें जल देकर शांति की प्रार्थना करेंगे। जब हम पितृ शांति का कोई उपाय नहीं करते, तो वे कई जन्मों तक सर्प योनि भोगते हैं, इसी से कालसर्प दोष बनकर जातक को पीड़ित करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ गण वंश की वृद्धि करते हैं। पितृ मातृकाएँ धन बढ़ाती हैं और मातृमातृकाएँ हमें निरोग स्वस्थ रख घर में सुकून प्रदान कर लंबी आयु देती हैं। इसलिए १०० कम छोड़कर कनागत या कर्ण -आगत के दौरान पितरों के निमित्त ध्यान, पूजा-पाठ, दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। सबसे पहले...

क्या पचास के बाद पुरुष खल्लास होने लगता है? अमृतम पत्रिका

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उम्र ५० हो या इससे भी ज़्यादा। शादी तो कर लेना चाहिए। शादी के बाद खल्लास आदमी में भी योवन उभरने लगता है। स्त्री एक एनर्जी है। किसी मिस्त्री को जब स्त्री का साथ मिल जाता है, तो काफ़ी ग़म दूर होने लगते हैं। जाम का गिलास अपने आप ही छूट जाता है। ५० की उम्र में विवाह के फायदे ही फायदे हैं! नुकसान न के बराबर। अगर कामुकता या कामवासना की कमी है, तो नारी जमी को असमान पर उठा सकती है। सही मिस्टर वही है जो रात बिस्तर पर योनि का पलस्तर कर सके। वैसे बस्तर के आदिवासियों को देखा है कि वे ६० के बाद भी खाट तोड़ने की क्षमता रखते हैं। वीर्य में वीरता न हो तो शादी की बिल्कुल न सोचें

कलयुगी देवर भाभी पर क्यों फ़िदा हो रहे हैं?

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खुली छूट है। क्यों जीवन को नर्क बनाने पर तुली हो। पति के रहते प्यार का मतलब है देवर का औजार ज़्यादा मजबूत है और रस ले चुकीं है। संसार में सारा सार हथियार में है। जैसे कुंवार के महीने में अक्सर सबको बुखार आता है वैसे ही महिलाओं को प्यार का भूत सवार होता है। आज देवर का घेवर खाने की लत लग गई तो पति के प्रति तेवर बदल जाएगा। समर्पण कम होगा। फिर, दूसरा तलाश कर उसके जेवर पहनोगी। जब जब मौका मिलेगा, आप धोखा देंगे ही। आपकी हालत सड़क पर लगे पेवर की तरह हो जाएगी कोई भी अकड़ इस्तेमाल करेगा। हमतो यही कहेंगे कि नेवर यानी पड़ोसी से और देवर से कभी प्यार मत करो। नेवर नेवर!

क्या तालाब में नहाने से महिलाओं का सौंदर्य निखरता है? क्या ये खूबसूरती वृद्धि का प्राकृतिक उपाय है?

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रानियां तालाब में केवल नीचे तल के तले की गर्मी शांत करने जाती थी। क्योंकि उनका ताला खुलने की बारी दो से तीन महीने में एक बार आती थी। रही बात नल की तो एक राजा के १०० रानियाँ होती थी और अकेले राजा का एक नल वो सबको कैसे स्नान करा पाता। रानी की कहानी मत पूछो इनकी जवानी की दुनिया दीवानी होने के बाद भी ये खानी रोज नहीं खा पाती थीं। इन्हें धन का सुख तो पर्याप्त रहता था लेकिन तन का सुख बहुत इंतजार के बाद ही ले पाती थीं फिर राजा की मर्जी कि स्तन पर भी हाथ नहीं फेरा और दूसरा डेरा में जाकर सहवास कर लिया।

लोग आजकल घर में घर लगाने को क्यों आतुर हैं?

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 रिश्तों की मिठास पर वासना की चाशनी चढ़ने लगे, तो समझो आप पतन की सीढ़ी उतारने वाले हैं। भाभी कोई टेल की चाबी नहीं है कि कोई भी खोल दे। घर का मालिक ही ताला खोलने का अधिकारी है। रोज रात नाभि में तेल लगाकर सोएं इससे कामवासना शांत होगी और भाभी के तले का ताला खोलने की चाबी खोजने की कामुक इच्छा अपने आप ही मर जाएगी।  मन में संस्कारों का दीपक जलाइए; क्योंकि शरीर की गर्मी से अधिक खतरनाक मन की भटकन होती है! कलयुग की कलाकारी देखें कि कभी देवर अपनी भाभी के चरण छूकर आशीर्वाद लेता था, आज कुछ लोग उन्हीं रिश्तों में छिपे आकर्षण को मज़ाक, छेड़छाड़ और कामुक कल्पनाओं का विषय बनाने लगे हैं। कभी भाभी घर की माँ-समान बड़ी होती थी, आज सोशल मीडिया ने रिश्तों की मर्यादा को भी मनोरंजन का सामान बना दिया है। घेवर मिठाई है, रिश्तों की मर्यादा नहीं कि जब मन आया, उसे चाशनी में डुबो दिया! देवर का भाभी से हँसना-बोलना गलत नहीं, लेकिन उस हँसी में छिपी नीयत यदि सम्मान की जगह वासना तलाशने लगे, तो समझिए रिश्ते की नींव में दरार पड़ने लगी है। आकर्षण मनुष्य की स्वाभाविक कमजोरी हो सकता है, पर हर इच्छा को पूरा करना कोई ...