ग़रीब को क़रीब से जान पाना मुश्किल है- #amrutamglobal


  • संसार में जो ज़्यादा स्वार्थ और समाज, दोस्त-यार के क़रीब है, वो उतना ही ग़रीब है क्योंकि उसे समय का मुक्त ज्ञात नहीं है। नई नई खोज और तरकीब से ग़रीब भी अमीर बन सकता है।

अनुभवों की पूँजी अमीर बनाती है

  • गरीब का पसीना उसकी मजबूरी कहलाता है, और अमीर का विचार उसकी कामयाबी। क्या मेहनत की कीमत इंसान की हैसियत देखकर तय होती है?
  • ज़रा उस गरीब मजदूर को देखिए, जो सुबह सूरज निकलने से पहले काम पर निकलता है। उसके हाथों में छाले हैं, शरीर थका हुआ है, पेट में कभी-कभी भरपेट भोजन भी नहीं होता।
  • वह दिनभर पत्थर तोड़ता है, बोझ उठाता है और शाम को घर लौटकर सोचता है कि कल परिवार का चूल्हा कैसे जलेगा।

समाज कहता है कि बेचारा, मजबूर है!

  • अब उस अमीर व्यक्ति को देखिए, जो घंटों एक कमरे में बैठकर सोचता है, पढ़ता है, योजनाएँ बनाता है और भविष्य के सपने देखता है। वह अपने दिमाग से कोई नया व्यवसाय खड़ा करता है, जोखिम उठाता है और एक दिन सफल हो जाता है।
  • समाज कहता है कि वाह! कितना बुद्धिमान, कितना दूरदर्शी और कितना मेहनती इंसान है! लेकिन सवाल यह है कि क्या मेहनत का सम्मान करने के लिए भी धनवान होना जरूरी है?

शारीरिक मेहनत पेट पालती है, मानसिक मेहनत रास्ते बदल सकती है!

  • शारीरिक श्रम का अपना सम्मान है। किसान की मेहनत के बिना अन्न नहीं, मजदूर के बिना निर्माण नहीं और कारीगर के बिना संसार की व्यवस्था नहीं चल सकती। उनके परिश्रम को छोटा समझना मानवता का अपमान है। लेकिन जीवन का एक दूसरा सत्य भी है।
  • शारीरिक मेहनत से मनुष्य आजीविका कमा सकता है, जबकि अध्ययन, मनन, चिंतन, अनुभव और दूरदर्शी सोच उसे अपनी आजीविका के तरीके बदलने का अवसर दे सकते हैं।
  • गरीब व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या हमेशा उसकी बुद्धि की कमी नहीं होती। कई बार उसकी समस्या यह होती है कि उसके पास सोचने का समय ही नहीं होता!
  • जब सुबह से शाम तक पेट की आग बुझाने की चिंता हो, बच्चों की फीस भरनी हो, मकान का किराया देना हो और रात को थका हुआ शरीर आराम माँग रहा हो, तब किताब खोलना, नए कौशल सीखना और भविष्य की योजना बनाना आसान नहीं होता।
  • जिसके सामने आज की रोटी का संकट हो, उसके लिए कल का सपना देखना भी कभी-कभी विलासिता बन जाता है।
  • इसलिए गरीब को यह उपदेश देना आसान है कि बड़े सपने देखो, लेकिन उसे सपनों तक पहुँचने के लिए समय, शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसर देना कहीं अधिक जरूरी है।
  • अमीर केवल दिमाग से अमीर नहीं बनता, वह अपनी सोच को व्यवस्था में बदलता है! सफल व्यक्ति की असली ताकत केवल उसका सोचना नहीं, बल्कि अपने विचार को कार्ययोजना में बदलना है।

अमीर जमीर जागता है, तो पूछता है?

  • मैं अपनी मेहनत का मूल्य कैसे बढ़ा सकता हूँ?
  • क्या कोई नया कौशल सीख सकता हूँ?
  • क्या ऐसा काम कर सकता हूँ, जिससे मेरी अनुपस्थिति में भी आय उत्पन्न हो?
  • क्या मैं अकेले काम करने के बजाय दूसरों के साथ मिलकर कुछ बड़ा बना सकता हूँ?
  • आज की कमाई में से थोड़ा समय और धन अपने भविष्य के लिए कैसे बचा सकता हूँ? यही प्रश्न धीरे-धीरे सोच की दिशा बदल सकते हैं।
  • मगर यह भी याद रखना चाहिए कि हर अमीर व्यक्ति केवल बुद्धि से अमीर नहीं बना और हर गरीब व्यक्ति अवसर मिलने पर भी सफल हो जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है।
  • पारिवारिक परिस्थितियाँ, शिक्षा, पूँजी, सामाजिक अवसर, स्वास्थ्य, भाग्य और सही समय सभी की भूमिका होती है।
  • गरीबी कोई अपराध नहीं, लेकिन परिस्थितियों से बाहर निकलने के रास्ते खोजना एक महत्वपूर्ण प्रयास हो सकता है।
  • गरीब को उसकी गरीबी के लिए दोषी ठहराना उतना ही अनुचित है, जितना अमीर की हर सफलता को केवल भाग्य का परिणाम मान लेना। एक श्लोक, जो जीवन की दिशा समझाता है

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥

  • कार्य केवल इच्छा करने से पूरे नहीं होते, उनके लिए प्रयास करना पड़ता है। सोए हुए सिंह के मुख में भी हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करता।
  • इसका संदेश केवल शारीरिक मेहनत करना नहीं है। सही दिशा में प्रयास करना, ज्ञान अर्जित करना, समय का उपयोग करना और अपनी परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
  • सपने देखना शुरुआत है, सीखना तैयारी है और निरंतर कर्म करना उन्हें वास्तविकता में बदलने का रास्ता है।
  • गरीब को रोटी भी चाहिए और विचार करने का अवसर भी! हम अक्सर गरीब से कहते हैं। मेहनत करो, आगे बढ़ो!
  • लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि उसे अच्छी शिक्षा, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, सुरक्षित काम और अपने बच्चों के भविष्य की योजना बनाने का अवसर मिला भी है या नहीं?
  • भूखा मनुष्य भी बुद्धिमान हो सकता है, मगर भूख उसकी एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता को कठिन बना सकती है।
  • थका हुआ शरीर भी सपने देख सकता है, लेकिन उसे उन सपनों पर काम करने के लिए विश्राम और समय चाहिए।
  • इसलिए गरीब को केवल प्रेरक भाषण नहीं, अवसर भी चाहिए। और अमीर को केवल अपनी सफलता का गर्व नहीं, अपने संसाधनों और अनुभव से दूसरों के लिए रास्ते खोलने की संवेदनशीलता भी चाहिए।

अंत में, समाज से एक सवाल!

  • क्या हम किसी मजदूर का सम्मान इसलिए करेंगे कि उसके कपड़े साफ हैं, उसकी आय अधिक है या उसका पद बड़ा है? या इसलिए कि वह ईमानदारी से अपने श्रम द्वारा संसार को बेहतर बनाने में योगदान दे रहा है?
  • याद रखिए—मेहनत हाथों से हो या दिमाग से, उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन यदि मनुष्य केवल मेहनत करता रहे और कभी अपनी दिशा पर विचार ही न कर पाए, तो उसकी पूरी जिंदगी संघर्ष में गुजर सकती है।
  • इसलिए गरीब को मेहनत छोड़ने की नहीं, अपनी मेहनत के साथ ज्ञान, कौशल, बचत, योजना और बड़े सपनों को जोड़ने की जरूरत है।
  • और समाज को अपनी दृष्टि बदलने की जरूरत है क्योंकि किसी व्यक्ति की वर्तमान आर्थिक स्थिति उसकी पूरी क्षमता का प्रमाण नहीं होती।
  • गरीब की मजबूरी पर दया मत कीजिए, उसके परिश्रम का सम्मान कीजिए। उसे अवसर दीजिए, शिक्षा दीजिए और इतना समय दीजिए कि वह केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बेहतर जीवन बनाने के लिए भी सोच सके।
  • क्योंकि हो सकता है, आज जो व्यक्ति दूसरों के मकान बनाने के लिए ईंटें उठा रहा है, उसके भीतर कल एक ऐसा विचार जन्म ले, जो हजारों लोगों को रोजगार दे सके।
  • इंसान की असली गरीबी जेब में पैसे न होना नहीं; कभी-कभी सबसे बड़ी त्रासदी यह होती है कि परिस्थितियाँ उसे अपनी संभावनाएँ पहचानने का अवसर ही नहीं देतीं।
  • और समाज की असली अमीरी तब होगी, जब वह किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी जेब से नहीं, उसके श्रम, चरित्र, विचार और मानवीय गरिमा से आँकना सीखे।

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