महर्षि अगस्त्य की महालक्ष्मी साधना
- अमृतम पुस्तकालय में रखे प्राचीन ग्रंथ उपनिषद, वेद आदि अन्य स्रोतों के अनुसंधान, अध्ययन से ज्ञात हुआ कि अगस्त्यकृत लक्ष्मी स्तोत्र नाम से एक से अधिक पाठ-परंपराएँ मिलती हैं। संस्कृत दस्तावेज़ों में भी अगस्त्यरचित लक्ष्मीस्तोत्र अलग से उपलब्ध है।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण भी धन वृद्धि का अचूक उपाय है
भ्रम मिटायें
- मुझे उपलब्ध प्राचीन २०/२२ पुस्तकों के स्रोतों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला जिसमें कहा गया हो कि जन्मकुंडली में गुरु-शुक्र का नाड़ी संबंध/त्रिकोण/समसप्तक/युति हो तो अगस्त्यकृत लक्ष्मी स्तोत्र विशेष रूप से चमत्कारी सिद्ध होता है।
इसलिए इसे प्राचीन ग्रंथ का नियम बताना सही नहीं होगा।
गुरु + शुक्र श्री महालक्ष्मी से का संबंध
- पहले तो ये समझ लें कि महर्षि अगस्त्य ने लक्ष्मी और श्री महालक्ष्मी में काफ़ी फ़र्क़ बताया है। जो माया है! अस्थिर है, जो लम्बे समय तक स्थाई रूप से रुकती नहीं यानी रोज़ कमाना और खर्च करना ये सब श्रीहरि विष्णु की पत्नी लक्ष्मी के रूप हैं।
माँ महालक्ष्मी कौन है?
- स्थिर या स्थाई रूप से सदियों तक वास करने वाली को महादेव की शक्ति ही श्रीमहालक्ष्मी का दूसरा रूप है। इसलिए शिव की उपासना से धन-दौलत लम्बे समय तक रुकती है। ये ही अष्ट ऐश्वर्य की मालकिन है। आदि शंकराचार्य ने भी लिंगाष्टकम स्तोत्र में इसीलिए लिखा कि
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगम!
तत्प्रनमामी सदा शिव लिंगम!!
- सारा सार यही है कि विष्णु उपासक के पास अटूट धन-संपदा आ भी जाएगी लेकिन बहुत दिनों तक रुकती नहीं है और शिव भक्तों के एक बार श्रीमहालक्ष्मी घर आ गई गई, तो कई पीढ़ियों तक जाती नहीं है। देश के सभी उद्योग घराने परम शिव भक्त हैं और उनके पूर्वज भी थे।
अगस्त्यकृत महालक्ष्मी स्तोत्र का मूल भाव
- जिस पाठ को आपके प्रश्न के लिए सबसे प्रासंगिक पाया, उसमें अगस्त्य ऋषि महादेव पत्नी श्रीमहालक्ष्मी से केवल धन नहीं, बल्कि अष्ट दरिद्र यानि दरिद्रता से रक्षा, संपत्ति की वृद्धि, सौभाग्य और जीवन की समृद्धि की प्रार्थना करते हैं-
जय पद्मपलाशाक्षि जय त्वं श्रीपतिप्रिये ।
जय मातर्महालक्ष्मि संसारार्णवतारिणि ॥
- अर्थात्-हे कमल के समान नेत्रों वाली, भगवान शिव प्रिय, संसार-सागर से तारने वाली माता माँ महालक्ष्मी! आपको बारम्बार नमस्कार है
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूतहितार्थाय वसुवृष्टिं सदा कुरु ॥
- अर्थात्-हे कमल में निवास करने वाली देवी! समस्त प्राणियों के हित के लिए धन-समृद्धि की वर्षा करें।
लक्ष्मीर्भूषयते रूपं लक्ष्मीर्भूषयते कुलं।
लक्ष्मीर्भूषयते विद्यां सर्वाल्लक्ष्मीर्विशिष्यते॥
- अर्थात्-माँ महालक्ष्मी रूप को सुशोभित करती हैं, कुल को सुशोभित करती हैं और विद्या को भी प्रतिष्ठा देती हैं; इसलिए महालक्ष्मी का व्यापक अर्थ केवल पैसा, दौलत नहीं, बल्कि श्री, सौभाग्य, प्रतिष्ठा और समृद्धि है।
महालक्ष्मी स्तोत्र का फलश्रुति भाग विशेष है
अंत में लक्ष्मीजी के वचन के रूप में आता है कि
यत्त्वयोक्तमिदं स्तोत्रं यः पठिष्यति मानवः ।
शृणोति च महाभागस्तस्याहं वशवर्तिनी ॥
यः पठेत्प्रातरुत्थाय श्रद्धाभक्तिसमन्वितः ।
गृहे तस्य सदा स्थास्ये नित्यं श्रीपतिना सह ॥
- अर्थात्- धन की इच्छा कामना रखने वाला जो श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ करता है, उसके घर में लक्ष्मी नहीं श्रीमहालक्ष्मी के स्थायी निवास की कामना व्यक्त की गई है। पाठ में सुख-सौभाग्य, बुद्धि, आयु-आरोग्य आदि की भी फलश्रुति आती है।
- एक दूसरे उपलब्ध प्राचीन पाठ-स्रोत, तन्त्रचिन्तामणि, में भी अगस्त्य द्वारा लक्ष्मी से वर माँगने और महालक्ष्मी द्वारा स्तोत्र-पाठ को अपने सान्निध्य का कारण बताने वाला पाठ मिलता है।
ज्योतिषीय प्रतीकवाद के आधार पर लक्ष्मी स्तोत्र
- परम शिव भक्त और महादेव के प्रिय शिष्य शुक्राचार्य और दैत्यों-दानवों के आचार्य शुक्र को महालक्ष्मी, अष्ट ऐश्वर्य, सौंदर्य, भोग, वाहन, दाम्पत्य, कला और भौतिक सुख से जोड़ा जाता है।
- गुरु- ज्ञान, धर्म, सद्बुद्धि, विस्तार, संरक्षण और शुभता का कारक माना जाता है। इसलिए गुरु और शुक्र का संबंध होने पर धन + ज्ञान/धर्म + सुख के विषयों को एक साथ देखने की परंपरा बनती है।
- आधुनिक नाड़ी-ज्योतिष सामग्री में भी गुरु और शुक्र के कारकत्वों को इसी प्रकार जोड़ा जाता है।
हमारा निवेदन-
- धन की ज़रूरत हो या वृद्धि करना हो, तो सटीक पूजा विधान या उपाय ये है कि हर महीने मास शिवरात्रि को किसी प्राचीन एकांत शिवालय में शाम को जाकर किसी वैदिक कर्मकाण्डी से रुद्राभिषेक एक साल तक नियमित करायें और पूजा के दौरान पाँच दीपक Raahukey oil के निरंतर जलने दें। एक साल बाद जब माँ महालशक्मी का आगमन होना आरम्भ होगा, तो आपसे सम्भाली नहीं जाएगी।
- राहुकाल में प्रतिदिन Raahukey oil के पाँच दीपक जलाकर शिव मंत्र का जाप और ध्यान करें। मात्र ४४ दिन के छोटे से उपाय द्वारा ज़िन्दगी की सारी गंदगी समाप्त हो जाएगी।
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