मेष लग्न राशि के रहस्य


  • मेश लग्न में अष्टम के गुरु की सप्तम दृष्टि दूसरे भाव पर पड़ती है और दूसरा भाव का स्वामी शुक्र होने से गुरु की दृष्टि अकारक रहती है।
  • अगर वृश्चिक लग्न होती और गुरु अष्टम में होकर दूसरे को देखते तो पैसे का अम्बर लग जाता। फिर भी परिवार समृद्धशाली और बड़ा कुटुंब होगा। सभी भौतिक सुख भोगने वाले होंगे।
  • आहुति के गुरु की पंचम दृष्टि द्वादश पर होने से जातक की बुद्धि विरक्त जैसी हो जाती है उसे भोग, सुख आदि से लाभ नहीं होगा।
  • हो सकता है कि ससुराल का परिवार बहुत धार्मिक पूजा पाठ वाला हो लेकिन भयंकर लोभी भी हो सकता है।
  • अष्टम के गुरु को प्रभावशाली बनाने हेतु चौथे यानी सुख भाव को मजबूर करें। माँ की सेवा करें। पुराना वहाँ न खरीदें। कोई भी गाड़ी ज़्यादा पुरानी न रखें।
  • गुरु को मजबूत बनाने के लिए मध्यमा यानी बीच वाली और सबसे छोटी उँगली में काले और नीले रंग का नीलम चाँदी में रविवार को दुपहर ११.५० से १२.२२ के मध्य पाँच दीपक Raahukey oil के जलाकर पहिने बहुत फ़र्क़ दिखेगा।

Comments

Popular posts from this blog

अमृतम रावण रहस्य विशेषांक ४० सालों का सतत संघर्ष और लेखन का परिणाम!

राहु की प्रसन्नता का सरल तरीका जाने

नरवर के राजा नल का जन्म जहाँ हुआ था था वो स्थान वीरान पड़ा है