जीवन एक यात्रा है

  • जीवन एक खेल है और हम सब खेल खेलने आए हैं। जब हम एक पैर रेल में और दूसरा पैर जेल में रखने की ठान लेते हैं, तो यात्रा सुगम हो जाती है।
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  • हजारों यात्रा करने के बाद भी कामनाओं की पूर्ति न हो सकी। आज भी हर चीज की मात्रा कम लगती है।
    • व्याकरण की शुद्धता भाषा को सुंदर बनाती है। विचारों की शुद्धता के साथ रेल यात्रा जीवन को सफल बनाती है।
  • यात्रा से ज्ञान बढ़ता है। बुद्धि खुलती है। कुछ करने की प्रेरणा मिलती है और सही जीवन साथी के रूप में पत्नी भी प्रेरणा मिल जाए, तो प्राणवायु बढ़ जाती है।
  • यात्रा की मात्रा और व्याकरण की मात्रा दोनों में ज़रा-सी भूल, अर्थ का मूल बदल देती है!
पराई नार से तार जोड़ने वाले लोग जीवन को बेकार कर लेते हैं। 

शब्दार्थौ सहितौ काव्यं, शब्दो हि परमं बलम्।
शब्ददोषे विनश्यन्ति, सर्वेऽर्थाः क्षणमात्रतः॥

  • शब्द और अर्थ मिलकर वाणी को सार्थक बनाते हैं। यदि शब्द में दोष आ जाए, तो उसका अर्थ भी नष्ट हो जाता है।
  • जीवन यात्रा, शव यात्रा, बस यात्रा, रेल यात्रा, हवाई यात्रा, तीर्थ यात्रा, वन यात्रा, व्यापार यात्रा, ज्ञान यात्रा, धर्म यात्रा, कर्म यात्रा, मन यात्रा, आत्म यात्रा, सत्ता यात्रा, संघर्ष यात्रा, सफलता यात्रा।
  • विवाह यात्रा, अंतिम यात्रा, विजय यात्रा, साधना यात्रा, परिवार यात्रा, विदेश यात्रा, अंतरिक्ष यात्रा, मोक्ष यात्रा आदि यात्राओं की संख्या अनंत है। उसी प्रकार भाषा में मात्राएँ भी अर्थ की दिशा बदल देती हैं।

एक छोटी-सी मात्रा की भूल से

  • दिन → दीन
  • बल → बाल
  • कुल → कूल
  • सुर → सूर
  • मल → माल
  • सुख → सूख
  • पल → पाल
  • कर → कार आदि जैसे यात्रा का मार्ग बदलने से मंज़िल बदल जाती है, वैसे ही मात्रा बदलने से शब्द का मूल अर्थ बदल जाता है।
  • बचपन से ही खतरनाक खोपड़ी रही। स्कूल में एक बार दूसरे दिन छूटी का ब्लैक बोर्ड बाहर लगा था कि कल विद्यालय बंद रखा जाएगा।
    • हमारी बुद्धि चली और बोर्ड पर केवल बन्द के आगे लिखा र शब्द को उसमें जोड़ दिया, तो अर्थ हो गया कि

कल विद्यालय बंदर खा जाएगा।

  • मात्रा भी केवल शब्द नहीं बदलतीं, बल्कि भाव, अर्थ और प्रभाव भी बदल देती हैं। उसी प्रकार जीवन में छोटी-सी भूल भी पूरी दिशा बदल सकती है। जन्म से मृत्यु तक यात्रा अनंत हैं। कुछ रोचक उदाहरण
  • जन्म यात्रा → मृत्यु यात्रा इन सभी यात्राओं का मार्ग अलग है, परंतु हर यात्रा में सही दिशा, सही शब्द और सही मात्रा का महत्व समान है।
  • व्याकरण में एक मात्रा की भूल शब्द का मूल अर्थ बदल देती है। जीवन में एक छोटी भूल चरित्र, संबंध, स्वास्थ्य और भविष्य की दिशा बदल सकती है।
  • मेरी जीवन यात्रा के बारे में जानने को उत्सुक हो, तो नीचे पूरा लेख आपको शक्ति देगा। सख्त नदियों को मुलायम कर जीने की उमंग भरेगा।
  • सवाल ये नहीं कि आपको सफलता कैसे मिली। सोचना ये है कि सबको सफलता कैसे मिले। इसके लिए दिमाग में आगे बढ़ने की आग जलाना पड़ेगी। जी को २४ घंटे जुनून से भरना पड़ेगा। १८ से २० घंटे काम करना पड़ेगा। शिवभक्त अवश्य करें
  • सफलता की शुरुआत कठोर नियम-धर्म अपनाकर, पूर्ण संकल्प शक्ति के साथ करना पड़ता है। आप सोकर, रोकर सफल नहीं हो सकते। हर जगह ठोकर, धोखा खाकर ही उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • छल कपट जब कोई करता है तो वो हमारी आँखों के कपाट खोल देता है। मौक़ा तभी मिलेगा जब अंदर से तुम्हारी लौंका लेगी। बिना अपमान ज्ञानार्जन नहीं होता।
  • मात्र १२ साल की उम्र में ३०/- रुपये महीने के वेतन से जीवन की संसार के समक्ष संघर्ष शुरू हुआ। इस वक़्त दो टाइम का खाना भी ठीक से नसीब नहीं होता था। तन पर बस कुछ वस्त्र यानी वे-तन था।

सारे वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें। हमारा एक जबरदस्त इंटरव्यू CAREERKICK NEET पर भी आया।

  • प्यार किसी का मिला नहीं, तो प्यार किसी से कर भी नहीं पाए। सारा ध्यान केवल अपने कार्य, व्यापार पर दिया। करीब २० जगह नौकरी कर हर क्षेत्र का अनुभव लिया।
  • छोकरी से दूर भी नहीं रहे लेकिन इश्क़ के मामले क्रूर भी नहीं हुए। बतौर प्रतिनिधि १५ -१५ दिन के टूर किए। बहुत ज़्यादा पढ़े लिखे न होने के बाद भी समय मिलने पर लेखन सीखा। किताबें पढ़ीं।

Risk लिया, नौकरी नहीं की आज 100 करोड़ का धंधा | Ashok Gupta | Business Motivation | Josh Talks Hindi | Amrutam

We’re proud to share that Amrutam ’s story was featured on Josh Talks! ✨ In this talk, our founders Mr. Ashok Gupta and Mrs. Chandrakanta Gupta share how they started by supplying herbal medicines to doctors and medical stores, faced setbacks like losing their agency, and yet rebuilt from scratch with nothing but passion and perseverance. What began as a small venture in herbal healthcare has today grown into a ₹100-crore Ayurvedic wellness brand, carried forward by the next generation, Agnim Gupta and Stuti Ashok Gupta who rebranded Amrutam in 2017 and took it directly to people across India and the world. 🌏 Through every challenge, one thing has remained constant - our belief that the true strength of any business lies not in surface-level ties, but in genuine, meaningful relationships. 💚 Watch our journey on Josh Talks here: http://bit.ly/3UALJM3

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शून्य से शिखर के नीचे तक की पूरी कहानी

  • जोश से भरे इंसान कभी किसी को दोष नहीं देते और हमेशा होश में रहते हैं वे किसी तरह के Loss से नहीं डरते! सुभाष चंद्र बॉस का भी यही मानना था।
  • वैसे भी गर्मी न ऊन में होती है न जून में होती है और ना ही खून में होती है न चून में होती है जुनून में ही सर्वाधिक गर्मी होती है
  • सफलता, समृद्धि पाने तक हमेशा मंच, लंच और टंच प्रसिद्धि यानी पैसा से दूर रहें मेहनत की गुलामी करते रहें! हथेली में अपना भविष्य न खोजें
  • परमात्मा गिने चुने लोगों को ही संसार में कुछ कर दिखाने के लिए चुनता है। बुनकर की तरह जीवन का निर्माण करने के क्रम में अनेकों कष्ट, तकलीफ़ इसलिए देता है ताकि इंसान अनुभवी बने! क्योंकि अनुभवों का पूँजी अमूल्य धरोहर होती है
  • जब व्यक्ति अनुभवों की पूँजी जुटा लेता है, तो सफलता उसके कदम चूमने लगती है। शिखर चूमने के लिए घूमने की आदत भी डालें
  • बस, ऐसा ही मुझे अहसास हुआ। हमारे भारत के ऋषियों ने जीवन की संपूर्णता के लिए चार पुरुषार्थ बनायें हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष!
  • आज के परिवेश में इन चारों का नाम है धर्म यानि श्याम, अर्थ यानि दाम, दोनों काम और शिव धाम अर्थात मुक्ति!

आगे बढ़ने और सफलता पाने के ये चतुर्थ द्वार हैं!

  • ग़रीब परिवार और माँ बीमार पिता के पास न कोई व्यापार न कोई कमाई का मजबूत जरिया! छोटी सी हलवाई की दुकान थी जो कभी ठीक से चली नहीं! इसी दुकान से नाश्ता मिठाई बनाने का कम उम्र में ही सीख लिया! खैर ऊपर वाले की लिखी स्क्रिप्ट को कौन बदल सकता है फिर भी भोलेनाथ सबको पार लगाता है
  • १२/१३ साल की उम्र में मात्र ३०/ रुपये महीने किताब की दुकान पर नौकरी से बचपन आरम्भ हुआ! उम्र बढ़ी, जवान हुआ। दोस्त बने और साथ ही दोस्ती हो गई नशे से।
  • फिर माँ हमेशा बीमार रहती और सभी तरह की पैथी में इलाज कराया लेकिन एक वैद्य की देशी दवाई से उन्हें काफ़ी आराम मिला हुई और उसके इलाज के दौरान मुझे ऐसा रामबान मिला जिसने मेरी जिंदगी पलट के रख दी। तभी से सोचने लगा कि एक दिन आयुर्वेदिक औषधियों से दुनिया की बीमारी मिटाऊँगा!
  • लेकिन कहते है न हर कामयाब इंसान के पीछे एक औरत का हाथ होता है, मेरी कहानी में वो औरत मेरी पत्नी थी।
  • कम उम्र में जब आपके सर पर जिम्मेवारी आती है तो जीवन जीने और उसको देखने का नजरिया आपको सबसे अलग कर देता है।
  • मैं ग्वालियर का रहने वाला हूँ का, पिता हलवाई थे और 6 भाई बहन में मैं सबसे बड़ा था। घर की जिम्मेवारी आना स्वभावीक थी। छोटी उम्र से काम शुरू किया।
  • कपड़े, किराने की दुकान पर भी काम किया। किताब प्रिंटिंग का काम सीखा, कंपोजिंग करना और प्रिंटिंग मशीन चलाना सीखा!
  • तीन चार साल की नौकरी में पब्लिकेशन का काफ़ी ज्ञान हासिल हुआ! किताब की दुकान में कुछ दिनों बाद ज़्यादा मन नहीं लगा, तो रेलवे से बिल्टी छुड़ाने की दलाली शुरू की लेकिन एक दिन किसी ने रेलवे की बिल्टियों का बेग चोरी कर लिया!
  • फिर दूसरे पब्लिशर्स के यहाँ जबलपुर ब्रांच में नौकरी करने चला गया ।दो साल वहाँ गुजारे! लेकिन मान का स्वास्थ्य ज़्यादा बिगड़ने के कारण ग्वालियर लौट आया।
  • इसी दरम्यान एक दिन अख़बार में प्रधान मंत्री योजना का विज्ञापन पढ़ा और २५०००/ loan के लिए एप्लाई कर दिया
  • दलाली कमीशन काटकर हाथ में १९०००/ रुपये आए और कुछ कर्ज लेकर अनसोल्ड पेपर छाप डाले लेकिन उसी साल शिक्षा नीति में बदलाव हुआ मेरी सारी किताबें रद्दी हो चुकी थीं! सब बर्बाद हो गया। नशे से दोस्ती थोड़ी और बढ़ गई। वेतन उस समय न के बराबर ही मिला करता था।

जीवन सर मात्र व्यापार ही है-

  • जो लिखेगा, वही भविष्य में दिखेगा और जो दिखेगा सो बिकेगा। व्यापार, कारोबार मार्केटिंग और जीवन का यही मूल मन्त्र है। खोर पर करीब ५ करोड़ पाठक हैं मेरे लेख पढ़कर दिमाग़ का फाटक खुल जाता है।





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