न मुंह छुपाकर जिओ
- चेहरे पर कपड़ा, पीछे बैठी चुपचाप, लगता, तो दाल में कुछ काला है लेकिन हर कहानी एक जैसी नहीं होती! क्योंकि हर दृश्य के पीछे कारण अलग हो सकता है।
- धूप, धूल, प्रदूषण, सुरक्षा, पहचान छुपाना, या सिर्फ़ तेज़ रफ्तार में संतुलन बनाए रखना।
- आजकल बाइक पर कई लड़कियाँ चेहरा ढककर और आगे बैठे व्यक्ति को पकड़कर बैठती दिखती हैं। इसे देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं।
- संस्कार केवल पहनावे, बैठने के तरीके या चेहरा ढकने से नहीं मापे जाते। संस्कार तो व्यवहार, वाणी, मर्यादा और विवेक में झलकते हैं।
न वसनैर्न भूषणैर्न रूपेण न च वाचसा।
संस्कारो हि मनुष्याणां चरित्रेण प्रकाशितः॥
- मनुष्य के संस्कार वस्त्र, आभूषण, रूप या शब्दों से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और आचरण से प्रकट होते हैं।
- आज का समय थोड़ा अलग है। धूप से बचाव, प्रदूषण से सुरक्षा और सोशल मीडिया के दौर में निजता बचाने की चाह भी एक कारण है। हाँ, इतना जरूर है कि सादगी और मर्यादा हर युग में सुंदर लगती है।
लज्जा शोभते नारीणाम्
अर्थात नारी की शोभा मर्यादा और शालीनता से बढ़ती है।
- लेकिन यह बात केवल बेटियों के लिए नहीं, बेटों पर भी उतनी ही लागू होती है। यदि युवक स्वयं संयमित, सम्मानजनक और जिम्मेदार हों, तो समाज का दृश्य भी अधिक संतुलित दिखेगा।
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