प्रतिदिन नहाना क्यों जरूरी है और नहाने के बाद ही खाने से क्या लाभ होता है
- स्नान, ध्यान में जीवन का सार छुपा है। जीवन के पार जाने के लिये ग्रन्थ, पुराण, वेद और आयुर्वेद के यम नियम को अपने जीवन में उतारें।
- अमृतम पत्रिका, ग्वालियर के संपादक श्री अशोक गुप्ता के अनुसार
- रोज स्नान के समय स्नान जल में 5 ML Rose वाटर ओर एक बूंद चन्दन का इत्र या तैयार चंदन मिलाकर नहाने से मन की प्रसन्नता का पार नहीं रहता।आप चाहें, तो अष्टगन्ध, केशर, रक्तचंदन, गुलाब जल, केशर, चन्दन इत्र आदि से निर्मित चन्दन को वही स्नान जल में मिला सकते हैं
- सुखी जीवन और तंदरुस्ती के लिए नियमित ध्यान और स्नान जरूरी कर्म है। इस मामले में तर्क, कुतर्क हमारे स्वास्थ्य के लिए सदैव हानिकरक सिद्ध होगा।
- बिना स्नान के जीना केवल योगियों के लिए ये संभव है। बद्रीनाथ के ऊपर नीलकंठ पर्वत में रह रहे अवधूत साधु त्रिनेत्र गिरी जी महाराज के जब दर्शन करने गया, तो उनकी काया चन्दन इतर से महक रही थी। जबकि उन्होंने कई महीनों से स्नान नहीं किया था।
- स्नान के बारे में उन्होंने बताया कि सांसारिक लोगों को शारीरिक शुद्धि हेतु नित्य स्नान करना चाहिए और स्वस्थ्य शरीर, यकृत को मजबूत बनाये रखने के लिए बिना नहाए कुछ नहीं खाना चाहिए।
- स्वाधिष्ठान चक्र जागृत होने के बाद स्नान करने की जरूरत नहीं पड़ती।
- अघोरी तांत्रिक दिन में 108 बार मानसिक स्नान कर तन, मन को शुद्ध करते हैं।
- मलकान गिरी उड़ीसा के एक अघोरी बाबा ने बताया कि जैसे मष्टिश में। नकारात्मक विचार आएं।
- मन भारी हो। शंका, भय, तनाव, भ्रम, चिंता परेशान कर, तो तुरंत स्नान जॉन चाहिए। क्योंकि मनुष्य मस्तिष्क में अनेक संक्रमण या वायरस घेरे रहते हैं, जो सिर पर पानी गिरते ही साफ हो जाते हैं।
- श्री श्री भवानी नादान यति जी महाराज के शब्दों में मानव मस्तिष्क शिवलिंग की तारा है। इसे महाकैलाश भी कहते हैं इस मस्तिष्क रूपी कैलाशों के राजसी को कोई नहीं जान पाया।
- हमारे मन मस्तिष्क में ७०० लेयर होती है ओर इसी में अनेक जन्मों का डाटा या स्मृति संग्रहित रहती है। इसी की शुद्धि के लिए हिन्दू धर्म में स्नान, ध्यान, शुद्धि, योग, टप, पूजा, विधान बताया है।
- हिमाचल के बिजली महादेव मंदिर में एक भजन सुना था- बाद में एक दिन यूट्यूब पर भी सुना- शिव कैलाशों के वासी धौरी धारों के राजा। शंकर संकट हरना। ये भजन आपको मन्त्र मुग्ध कर देगा।
- अगर आपका अंतर्मन पूरी तरह साफ और उजला हो गया है, तो स्नान की जरूरत नहीं है। क्योंकि भक्त रैदास ने लिखा है कि मन चंगा, तो कठौती में गंगा। लेकिन नंगा आदमी इन सबसे दूर ही है।
- हेल्दी लाइफ के लिए नियम से सुबह नहाना बहुत जरूरी है। हो सके, तो सूर्योदय के पूर्व स्नान कर भगवान आदित्य सूर्य को प्रणाम करें और बिना स्नान के अन्न ग्रहण न करें। हमारा दावा है कि आप हवन में कभी बीमार नहीं पड़ेंगे।
- मैंने स्वयं परिवार सहित इस नियम को जबसे अपनाया, तबसे परिवार के किसी सदस्य की कोई तकलीफ महसूस नहीं हुई।
- अशोकजी के अनुसार आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा और भारतीय संस्कारों को अपनाकर ही आप स्वस्थ्य, प्रशन्न ओर मानसिक क्लेशों से मुक्त राह सकते हैं।
- हो सके, तो अमृतम द्वारा प्रकाशित आरोग्य अंक किसी मेडिकल स्टोर्स या चिकित्सक यहां मिल जाए, तो अवश्य पढ़ें। ये 2006 से 2016 तक लगभग 50000 अमृतम पत्रिका निशुल्क भेजी जाती थी।
- पत्रिका पढ़ने के बाद शायद ही कभी कोई दवाई खाने की आवश्यकता पड़े।
- मानसिक शांति के लिए नीचे कुछ मेडिटेशन शास्त्रीय संगीत के वीडियो दिये जा रहे हैं। जिन्हें भी सुने
- इस आर्टिकल से आपको तंदरुस्त रहने की प्रेरणा मिलेगी
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